यूहीं गुज़रते गुज़रते,
यूहीं गुज़रते गुज़रते,
एक रोज़ एक सुबह मिल गयी,
फज्र मैं तुमने जो की थी वोह दुआ मिल गयी.
यूहीं गुज़रते गुज़रते...
यूहीं गुज़रते गुज़रते,
एक रोज़ एक धुप(after नून) मिल गयी,
गठरी मैं बंद गुड़ और रोटियाँ नर्म मिल गयी,
यूहीं गुज़रते गुज़रते...
यूहीं गुज़रते गुज़रते,
एक रोज़ एक शाम मिल गयी,
गुलाब से लिपटी एक चिठ्ठी मेरे नाम मिल गयी,
यूहीं गुज़रते गुज़रते...
यूहीं गुज़रते गुज़रते,
एक रोज़ एक रात मिल गयी,
तेरी भूली-बिसरी यादों की सौगात मिल गयी,
यूहीं गुज़रते गुज़रते...!
यूहीं गुज़रते गुज़रते...!
- समीर
Thursday, January 27, 2011
Tuesday, January 18, 2011
तू मगर...है बे-खबर|
हर शख्स, हर परिंदा, जाने पूरा शहर,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
अनजान बन कर यु,ना बरसा हम पे कहर,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
पैगाम लेकर आई हे मेरा, मौसम की यह सर्द लहर,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
गुज़रे तू जहांसे , इंतज़ार कर रहे है हर वोह मंज़र,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
पैंतरे भी काम ना आ रहे, दूआयें भी हो रही बे-असर,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
- समीर
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
अनजान बन कर यु,ना बरसा हम पे कहर,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
पैगाम लेकर आई हे मेरा, मौसम की यह सर्द लहर,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
गुज़रे तू जहांसे , इंतज़ार कर रहे है हर वोह मंज़र,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
पैंतरे भी काम ना आ रहे, दूआयें भी हो रही बे-असर,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
- समीर
Monday, January 3, 2011
मीठी सी बात
कितनी अजीब लेकिन मीठी सी बात है
मेरी सारी खुशियों की तुज से शुरुआत है|
बन कर आया है मेहमां, चौदवी का चाँद आज,
और सितारों से सजी ये मतवाली रात है|....कितनी अजीब...
छू रही हे लेहरें समंदर की तुजको,
और उन्हें तेरी लहराती जुल्फों का साथ है|....कितनी अजीब...
महसूस की थी खलिश (अकेलापन) , तुजे पाने से पेहले,
अब तू है, मैं हूँ और मेरे हाथो में तेरा हाथ है|
कितनी अजीब लेकिन मीठी सी बात है
मेरी सारी खुशियों की तुज से शुरुआत है|
- समीर
मेरी सारी खुशियों की तुज से शुरुआत है|
बन कर आया है मेहमां, चौदवी का चाँद आज,
और सितारों से सजी ये मतवाली रात है|....कितनी अजीब...
छू रही हे लेहरें समंदर की तुजको,
और उन्हें तेरी लहराती जुल्फों का साथ है|....कितनी अजीब...
महसूस की थी खलिश (अकेलापन) , तुजे पाने से पेहले,
अब तू है, मैं हूँ और मेरे हाथो में तेरा हाथ है|
कितनी अजीब लेकिन मीठी सी बात है
मेरी सारी खुशियों की तुज से शुरुआत है|
- समीर
Subscribe to:
Posts (Atom)