हर शख्स, हर परिंदा, जाने पूरा शहर,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
अनजान बन कर यु,ना बरसा हम पे कहर,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
पैगाम लेकर आई हे मेरा, मौसम की यह सर्द लहर,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
गुज़रे तू जहांसे , इंतज़ार कर रहे है हर वोह मंज़र,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
पैंतरे भी काम ना आ रहे, दूआयें भी हो रही बे-असर,
करता हूँ तुमसे प्यार, तू मगर...है बे-खबर|
- समीर
Tuesday, January 18, 2011
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