कितनी अजीब लेकिन मीठी सी बात है
मेरी सारी खुशियों की तुज से शुरुआत है|
बन कर आया है मेहमां, चौदवी का चाँद आज,
और सितारों से सजी ये मतवाली रात है|....कितनी अजीब...
छू रही हे लेहरें समंदर की तुजको,
और उन्हें तेरी लहराती जुल्फों का साथ है|....कितनी अजीब...
महसूस की थी खलिश (अकेलापन) , तुजे पाने से पेहले,
अब तू है, मैं हूँ और मेरे हाथो में तेरा हाथ है|
कितनी अजीब लेकिन मीठी सी बात है
मेरी सारी खुशियों की तुज से शुरुआत है|
- समीर
Monday, January 3, 2011
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nice gazal bro.
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